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Millet Farming: बाजरे की खेती व प्रमुख किस्में, सिंचाई, कटाई कैसे करें

Millet Farming | Pearl Millet Cultivation In Hindi | Bajre Ki Kheti |

Millet Cultivation: आज के इस पोस्ट में आपकों बताएंगे की बाजरे की खेती (bajre ki kheti) कैसे की खेती कैसे की जाती है और इसके साथ ही साथ आपको प्रमुख किस्मों और जुताई, बुवाई, सिंचाई, जलवायू, तापमान व कटाई के बारे में जानकारी देंगे।

खरीफ में बाजरे (Samalu) की खेती का बुवाई का समय

बुआई का समय: बाजरे की फ़सल की बुवाई जून, जुलाई के बीच कर देना चाहिए ताकि अच्छी फ़सल का उत्पादन अच्छा हों।

अवधि: बाजरे की फ़सल की तैयार होने में 80 से 85 दिन लगते है।

जायद में बाजरे की खेती का बुवाई का समय

बुआई का समय: बाजरे की फ़सल की बुवाई 1 मार्च से 30 अप्रैल के बीच कर देना चाहिए ताकि अच्छी फ़सल का उत्पादन अच्छा हों।

तापमान, मिट्टी की तैयारी व खेत की जुताई केसे करें (How to do temperature, soil preparation and plowing the field)

बाजरे की खेती (Little Millet Farming) सभी प्रकार की मिट्टी में कर सकते हैं बाजरे की अच्छी फ़सल लेने के लिए मिट्टी पलट हल से करनी चाहिए और उसके बाद 2 से 3 बार जुताई करके पाटा लगा देना चाहिए।

बाजरे की खेती में बीच की मात्रा (Intermediate quantity in millet cultivation)

एक एकड़ जमीन में बाजरे के बीज की मात्रा 1.5 से 2 किलो बीज की आवश्यकता होती है।

बाजरे की उन्नत किस्में (Millet Varieties)

पूसा 322: ये किस्म की फ़सल लगभग 75 से 80 दिन में तैयार हो जाती है। ओर इसके गुण की बात कि जाएं तो यह बाजरा की संकर किस्म है पौधे की ऊंचाई 150 से 210 Cm तथा उसके दाने की ओसतन पैदावार 25 से 30 Quintal ओर चारे की पैदावार 40 से 50 Quintal है।

Raj 171: यह किस्म 80 से 85 दिन में कटाई के लिए तैयार हो जाती है। यह किस्म को सामान्य वर्षा के पहले बिजाई के लिए अच्छा माना जाता है। इसकी औसतन पैदावार 8 से 10 quintal प्रति एकड़ है।

Pioneer 86 M 11: इस किस्म को तैयार होने में 75 से 80 दिन लगते हैं। यह किस्म के लिए सबसे अच्छा समयगर्मी का माना जाता है। यह समान लंबे और कॉम्पैक्ट इयरहेड्स के कारण अच्छी उपज देने वाला हाइब्रिड है इसमें पतले डंठल के साथ चौड़े पत्ते होते है लेकीन वर्दी टिलर के कारण अच्छे चारा पैदावार होती हैं।

गंगा कावेरी (Gk-1111): यह मध्यम लेट अवधि की किस्म और लम्बी किस्म है

Rasi-1818: यह किस्म की फ़सल को तैयार होने में 80 से 84 दिन लगते है और यह 84 से 87 दिन, कटाई तक हरी रहती हैं।

Pioneer – 86M86: यह किस्म की फ़सल 80 से 85 दिन में पककर तैयार हो जाती है इस किस्म की फ़सल प्रति एकड़ में 14 से 16 क्विंटल तक होती है यह किस्म मध्यम अवधि में तैयार होकर अच्छी फ़सल का उत्पादन करती हैं।

Kaveri HY Super Boss: कावेरी एचवाई सुपर बॉस किस्म कि फ़सल को तैयार होने में 80 से 85 दिन तैयार हो जाती है इस किस्म की फ़सल को सिंचाई की ज्यादा जरूरत होती हैं इसकी फसल प्रति एकड़ जमीन में 12 से 15 क्विंटल तक पैदावार होती हैं।

बायर 9444 (Bayer-9444): यह किस्म की फ़सल 80 से 85 दिन में तेयार हो जाती हैं ओर अच्छा उत्पादन देती हैं और इस किस्म की फ़सल को खरीफ और जायद दोनों मौसम में बो सकते हैं। इसकी फसल प्रति एकड़ जमीन में 12 से 15 क्विंटल तक पैदावार होती हैं।

श्रीराम 8494: यह बाजरे की उन्नत किस्म को पकने में 78 से 80 दिन में तेयार हो जाती हैं। इस किस्म को सभी राज्यों में उगाया जा सकता है। इसकी खेती का समय जून से जुलाई तक कर सकते है।

बलवान 4903: यह किस्म को तेयार होने में 80 से 90 दिन लगते है और यह अच्छी किस्म हैं इसकी खेती से प्रति एकड़ 18 से 20 क्वींटल पैदावार होती है इसकी किस्म को ज्यादा सिंचाई की जरूरत होती हैं इसकी खेती जून से जुलाई तक कर सकते हैं।

field grown millet
Millet Farming

बुवाई का तरीका (sowing method)

बाजरे की बुवाई (sowing of millet) छिटका विधि से कर सकते है। अगर आप इसकी बुवाई कतारों में करते हैं तो पौधे की दूरी 12 से 15 cm ओर पक्ति से पक्ती की दूरी 45 cm रखे।

उर्वरक व खाद प्रबंधन (Fertilizer and manure management)

बुवाई के समय 10 टन गोबर की खाद प्रति एकड़ की दर से बुवाई के लिए 20 से 25 दिन के बाद प्रयोग करना चाहिए और डीएपी (DAP) 40किलो ओर पोटास 25 किलो प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए। बुवाई की 21 से 30 दिन के बाद 30 दिन की फ़सल होने पर 1 एकड़ खेत में 35 kg Urea ओर 8kg जायम का उपयोग करे। ओर इसके बाद 50 से 55 दिन की फ़सल होने पर 1 एकड़ खेत में 35 kg Urea का उपयोग करे।

सिंचाई (irrigation)

बाजरे (Samalu) के फ़सल को 2 से 3 सिंचाई की जरूरत होती है फूल आते समय और दाना बनते समय नमी कम होने पर सिंचाई करे।

कटाई (harvesting)

बाजरे की किस्म के अनुसार जब दान सख्त और इनमे आवश्यक नमी हो तो फ़सल कटाई के लिए तेयार हो जाती है। इसकी कटाई दरांती से कर सकतें हैं।

Conclusion : आज हमने जाना की बाजरे की खेती कैसे की जाती है और बाजरे की फसल किस महीने में काटी जाती है और प्रमुख किस्मों के बारे में तो किसान भाइयों आज का आर्टिकल यही ख़त्म करते है हमें उम्मीद है की आपको यहाँ जानकारी पसंद आई होगी

English Summary: Bajra cultivation and major varieties, irrigation, how to harvest.

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मैं नवराज बरुआ, में मुख्य रूप से इंदौर मध्यप्रदेश का निवासी हुं। और में Mandi Market प्लेटफार्म का संस्थापक हूँ। मंडी मार्केट (Kisanguide.com) मूल रूप से मार्केट में चल रही ट्रेंडिंग खबरों को ठीक से समझाने और पाठकों को मंडी ख़बर, खेती किसानी की जानकारी देने के लिए बनाया गया है। पोर्टल पर दी गई जानकारी सार्वजनिक स्रोतों से प्राप्त की गई है।
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This Post Has 2 Comments

  1. SAURAV

    बाजरा सबसे ज्यादा कौन से राज्य में होता है?

    1. Navraj Barua

      बाजरा उत्पादन के मामले में राजस्थान सबसे आगे है तो वहीं कर्नाटक दूसरे नंबर पर है. जहां कुल बाजरा का 14.2 फीसदी उत्पादन होता है तो वहीं महाराष्ट्र जहां 13.9 फीसदी उत्पादन होता है. चौथे नंबर पर यूपी है, जहां 12.7 फीसदी उत्पादन होता है.

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