You are currently viewing Girger Farming: अदरक की खेती कैसे होती है ?
Ginger farming

Girger Farming: अदरक की खेती कैसे होती है ?

Ginger farming : अदरक की खेती मुख्यतः उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में की जाती है। इसके पौधे कंद के रूप में उगाए जाते हैं। अदरक का उपयोग मुख्य रूप से खाने में मसाले के रूप में किया जाता है, इसके अलावा इसका उपयोग मुख्य रूप से चाय बनाने, अचार बनाने और कई तरह के व्यंजनों में सुगंध जोड़ने के लिए किया जाता है। सोंठ का उपयोग सोंठ के रूप में भी किया जाता है, इसके अलावा यह कई प्रकार के रोगों जैसे पथरी, खांसी, जुकाम, पीलिया और पेट के कई रोगों में भी लाभकारी माना जाता है।

अदरक की खेती के लिए उपयुक्त मिट्टी, जलवायु और तापमान

अदरक की खेती के लिए उचित जीवाश्म और कार्बनिक पदार्थों से भरपूर मिट्टी की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, भूमि को सूखा जाना चाहिए। अदरक की खेती के लिए भूमि की. PH मान 6 के आसपास होना चाहिए। अदरक की फसल के लिए उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण जलवायु की आवश्यकता होती है। गर्मी का मौसम अदरक की फसल के लिए अधिक उपयुक्त होता है, क्योंकि इसके कंद गर्मी के मौसम में अच्छी तरह विकसित होते हैं। इसकी फसल समुद्र तल से 1500 मीटर की ऊंचाई पर करनी चाहिए। अदरक के पौधों को अंकुरित होने के लिए 20 से 25 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है, और कंदों के पकने के दौरान 30 से 35 डिग्री तापमान की आवश्यकता होती है।

अदरक कौन से महीने में लगाया जाता है, और जानिए कैसे ? (Ginger Seeds Planting Right time and Method)

अदरक के बीज कंद के रूप में लगाए जाते हैं। कंदों की रोपाई से पहले खेत में दवा तैयार की जाती है। खेत में मेड़ तैयार करते समय प्रत्येक खरपतवार के बीच एक से डेढ़ फीट की दूरी रखनी चाहिए, और बीज 15 सेमी की दूरी और 5 सेमी की गहराई पर लगाए जाते हैं। अदरक के पौधों को अधिक धूप की आवश्यकता होती है, इसलिए इसकी खेती छायादार स्थान पर नहीं करनी चाहिए।

भारत के उत्तरी भाग में अदरक के बीज बोने के लिए अप्रैल का महीना उपयुक्त माना जाता है, जबकि उत्तर भारत में इसके बीज मई के महीने में लगाए जाते हैं। इसके अलावा इसे मई और जून के महीने में भी लगाया जा सकता है।

एक हेक्टेयर खेती के लिए लगभग 140,000 कंदों की आवश्यकता होती है, जो लगभग 25 क्विंटल है। इसके बीजों की कीमत बहुत अधिक होती है इसलिए इसके बीज खरीदते समय इन्हें अच्छी तरह से देख लें कि कहीं कंद खराब तो नहीं हो गया है। खेत में बीज बोने से पहले, उन्हें प्लांटोमाइसिन या स्ट्रेप्टोसाइक्लिन के घोल से उपचारित करना चाहिए। इससे पौधों में जीवाणु रोग नहीं दिखते हैं।

अदरक के पौधे सिंचाई ( ginger plant irrigation )

अदरक की फसल को अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती है, लेकिन इसकी प्रारंभिक सिंचाई बीज बोने के 30 दिनों के भीतर कर लेनी चाहिए। इसके बाद पौधों को 15 से 20 दिनों के अंतराल पर पानी देना चाहिए। बरसात के मौसम में जरूरत पड़ने पर ही सिंचाई करनी चाहिए।

अदरक के खेत में खरपतवार नियंत्रण (Ginger Field Weed Control)

अदरक के पौधे मिट्टी की सतह पर रहकर पोषक तत्वों को अवशोषित करते हैं। इसलिए इसके पौधों को अधिक खरपतवार नियंत्रण की आवश्यकता होती है। खेत में खरपतवार नियंत्रण के लिए प्राकृतिक विधि निराई-गुड़ाई का प्रयोग किया जाता है। अदरक के खेत की पहली गुड़ाई बीज बोने के एक महीने बाद करनी चाहिए। अदरक के बीजों को गहराई से नहीं लगाया जाता है, इसलिए खरपतवारों की बहुत गहराई तक जुताई नहीं करनी चाहिए। इस खेत में 3 से 4 निराई करनी पड़ती है। पहली निराई के बाद बाकी की जोडाई 25 दिनों के अंतराल पर करनी होती है।

अदरक के पौधे से होने वाले रोग और उनकी रोकथाम

इस प्रकार की बीमारी को एक कीट के रूप में देखा जाता है, जिसका लार्वा पौधे के अंदरूनी तने को खा जाता है और उसे पूरी तरह नष्ट कर देता है। पौधों को इस रोग के हमले से बचाने के लिए उचित मात्रा में मैलाथियान का 20 दिनों के अंतराल पर 2 से 3 बार छिड़काव करना चाहिए।

पर्ण चित्ती रोग

इस रोग के लक्षण पौधों की पत्तियों पर दिखाई देते हैं। यह रोग पौधों की पत्तियों पर हमला करता है, जिससे पत्तियों पर धब्बे पड़ जाते हैं। इसके बाद यह रोग धीरे-धीरे पूरी पत्ती में फैल जाता है, जिससे पौधा प्रकाश संश्लेषण नहीं कर पाता और पूरी तरह नष्ट हो जाता है। इस रोग की रोकथाम के लिए 2 ग्राम गंधक को एक लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करना चाहिए।

अदरक की खेती, उपज और लाभ

अदरक के पौधे को परिपक्व होने में 8 महीने का समय लगता है। जब पौधे की पत्तियाँ पीली दिखाई दें तो अदरक की खुदाई करनी चाहिए। इसके बाद कंदों को पानी में डालकर अच्छे से धोकर छिलका हटा दें। इन कंदों को अच्छी तरह धूप में सुखाया जाता है। धूप में अच्छी तरह सूखने के बाद इन्हें स्टोर करके बाजार में बेचने के लिए भेज देना चाहिए। एक हेक्टेयर खेत में 15 से 20 टन अदरक की फसल प्राप्त होती है। अदरक का बाजार भाव 10 से 15 रुपये प्रति किलो है। जिससे किसान भाई एक बार की अदरक की फसल से आसानी से दो लाख कमा सकते हैं।

अदरक की खुदाई, पैदावार और लाभ (Ginger Cultivation, Yield and Benefits)

अदरक के पौधों को तैयार होने के लिए 8 महीने का समय लग जाता है | जब पौधे की पत्तियाँ पीले रंग की दिखाई देने लगे तब अदरक की खुदाई कर लेनी चाहिए | इसके बाद कंदो को पानी में डालकर अच्छे से धोकर छिलको को निकाल देना चाहिए | इन कंदो को अच्छी तरह से धूप में सूखा लिया जाता है | धूप में ठीक से सुखाने के बाद इन्हे भंडारित कर बाजार में बेचने के लिए भेज देना चाहिए | एक हेक्टेयर के खेत में 15 से 20 टन अदरक की फसल प्राप्त हो जाती है | अदरक का बाज़ारी भाव 10 से 15 रूपए प्रति किलो होता है | जिससे किसान भाई अदरक की एक बार की फसल से दो लाख की कमाई आसानी से कर सकते है |

Leave a Reply